प्रिय विद्यार्थियों, एक गाँव में दो मित्र रहा करते थे। एक था माली और दूसरा कुम्हार। कुम्हार मिट्टी के बर्तन बनाया करता था और माली फूल की खेती किया करता था। दोनों अपना उत्पाद बाजार में ले जाते, बेचते और उसी मुनाफे से गुजर-बसर करते। दिन बीतते गये और उनका व्यवसाय बढ़ता गया।
अब उन्हें अपना सामान बाजार में ले जाने के लिए किसी साधन की जरूरत महसूस होने लगी। उन दोनों ने मिलकर एक ऊँट की व्यवस्था की। ऊँट की पीठ के एक हिस्से पर कुम्हार अपने मिट्टी के बर्तन लादता और दूसरे हिस्से पर माली अपने फूल लादता था। जिन्हें वे बाजार ले जाकर बेचते, लौटते, यही क्रम चलता रहता।
एक दिन ऐसा हुआ कि एक ओर कुम्हार के बर्तन लदे हुए थे और दूसरी तरफ माली के फूल। माली ऊँट की नकैल, नकैल यानी वह रस्सी जो जानवरों के नाक में लगी रहती है जिसे पकड़कर आगे-आगे चला जाता है, पकड़े हुए था और उसका दोस्त कुम्हार पीछे-पीछे ऊँट को हाँक रहा था।
आधे रास्ते में पहुँचते ही ऊँट को भूख लग जाती है, वह पीछे गर्दन घुमा-घुमाकर माली के फूलों को खाने लगता है। माली आगे रहता है। वह सोचता है कि उसका दोस्त पीछे है ही, उसे पीछे मुड़कर देखने की क्या जरूरत है। माली आगे-आगे चलता रहता है और ऊँट पीछे मुड़-मुड़कर माली के फूल खाता रहता है। इधर कुम्हार सोचता है कि ठीक है, ऊँट माली के ही फूल खा रहा है, इससे मेरा क्या बिगड़ता है ? और वह ऊँट को टोकता नहीं है, रोकता नहीं है, मना नहीं करता है। ऊँट फूल खा रहा है, आप समझ रहे होंगे कि क्या घटना घटने वाली है।
फूल और बर्तनो में एक संतुलन है, जिसके कारण ये दोनों सामान ऊँट की पीठ पर रुके हुए हैं। जैसे ही फूल का वजन कम होता है, ऊँट की पीठ पर रखे हुए मिट्टी के बर्तन पलट जाते हैं। फूल का वजन कम हुआ और ऊँट की पीठ पर रखा हुआ सामान पलट गया, नुकसान किसका हुआ यह बताने की जरूरत नहीं है। सारे-के-सारे मिट्टी के बर्तन फूट गये, लेकिन फिर भी कुछ फूल तो शेष बच ही गये। मेरा क्या बिगड़ता है ? फूल तो माली के हैं। लेकिन बिगड़ा किसका ? जिसने ऐसा सोचा।
प्रिय विद्यार्थियों, यह विद्यालय भी एक परिवार है और आप अपना काफी समय यहाँ गुजारते हैं। आपके बगल में बैठा हुआ विद्यार्थी क्या कर रहा है, उसकी गतिविधियाँ क्या हैं, उसकी ऐसी कौन-सी एक्टिविटी है जो पूरे क्लास को नुकसान पहुँचा सकती है, इस पर आपको गौर करना है। अगर आप सोचते हैं कि नहीं, गड़बड़ी तो वह कर रहा है, उससे आपका कोई नुकसान नहीं होने वाला है तो यह गलत है। एक घण्टी चालीस मिनट की होती है और आप भी चालीस हैं। किसी कारण से अगर एक मिनट का भी नुकसान होता है तो वह नुकसान एक मिनट का नहीं है। वह नुकसान कितने मिनट का है ? चालीस मिनट का है, क्योंकि सभी के एक-एक मिनट का नुकसान हुआ।
एक-दूसरे का हित इसी में है कि जिस उद्दे’य से आप यहाँ आए हैं, केवल उसी की पूर्ति के लिए अपना दिमाग लगायें, उसी दिनों में सोचें, उसी दिशा में कार्य करें। क्षेत्र तो बहुत है लेकिन आपके लिए केवल एक ही है, जो आपका उद्देश्य है। अपने उद्देश्य के प्रति समर्पण की भावना रखें और ऐसी सोच न रखें जैसी सोच उस कुम्हार की थी कि मेरा क्या बिगड़ता है ? कोई भी गलत एक्टिविटी ऐसी नहीं हो सकती है कि उससे आपका नुकसान बच जाए केवल दूसरे का ही नुकसान हो।
प्रिय विद्यार्थियों, आप सब परिवार के रूप में यहाँ हैं, समूह के रूप में हैं, एक मिनट की गड़बड़ी सभी को समान रूप से नुकसान पहुँचाएगी और वह मल्टिपल में नुकसान पहुँचाएगी। जैसा कि मैंने आपको बताया कि एक मिनट बराबर चालीस मिनट कम-से-कम। आप इन बातों का ध्यान रखें, कोई ऐसी एक्टिविटी को अंजाम न दें, न ही ऐसी बात आपके मन में आए कि इससे मेरा क्या बिगड़ता है ? या इससे मेरा क्या नुकसान होता है ?
अगर आप ऐसी सोच रखते हैं तो निश्चित रूप से सबसे ज्यादा नुकसान आपका है। पहला नुकसान भी आपका है और अन्तिम नुकसान भी आपका है क्योंकि आपका दिमाग उतने समय के लिए उधर जा रहा है। इधर-उधर की बातों में अपना दिमाग न दौड़ायें, जिस उद्देश्य से आए हैं उस पर दृढ़ रहें, उसी के बारे में सोचें, उसी पर कार्य करें।
आप इस दिशा में लगे हैं, लगे रहेंगे, आप सफल हो रहे हैं, आप सफल होते रहेंगे, आप सफल हों।
धन्यवाद।