प्रिय विद्यार्थियों, आज की कथा वार्ता इस वर्ष के दो सौ बावनवें दिन की है। आज बुधवार है और जो युति आज बनी हुई है इस समय, वह आज से ठीक सौ साल पहले बनी थी, उन्नीस सौ नौ में या फिर आज के सौ साल बाद इक्कीस सौ नौ में बननी है। इस विचित्र घड़ी में, इस शुभ मुहूर्त में जो बात हमारी आपसे होनी है, वह गीता के अट्ठारहवें अध्याय का बयालीसवाँ श्लोक है, जो ब्रह्म कर्म को परिभाषित करता है। उस ब्रह्म कर्म से ही हम अपनी बात शुरू करते हैं-
शमो दम स्तपः षौचं क्षान्तिरार्जवमेव च,
ज्ञानं विज्ञानं मस्तिक्यं ब्रह्मकर्म स्वभावजम्।
अर्थात् इसमें वर्णित नौ गुणों को धारण करने वाला व्यक्ति ब्रह्मज्ञानी होता है। अब जो इन नौ गुणों को धारण करता है, उसे गीता में ब्रह्मज्ञानी कहा गया है। यह ब्रह्मज्ञानी की परिभाषा है।
यहाँ मेरा कहना है आपसे और यही मेरा मानना भी है कि यह प्रकृति जिसमें हम, हमारा अस्तित्व हैं, जिसमें हम जीते हैं, वह स्वयं ब्रह्मज्ञानी है। यह प्रकृति शाश्वत रूप से ब्रह्मज्ञानी है और गीता के अट्ठारहवें अध्याय के बयालीसवें श्लोक में जो बात भगवान श्रीकृष्ण ने कही है, वह उन नौ गुणों को पूर्णतः परिभाषित करती है और आच्छादित भी करती है। आइए देखें, कैसे ?
पहला गुण क्या है ? ब्रह्मज्ञानी का पहला गुण है शमो यानी अन्तःकरण की शुद्धि। अब प्रकृति में आइए तो प्रकृति तत्व अग्नि है। अग्नि का क्या काम है ? अग्नि अहर्निष शुद्ध रहती है। जो भी उसके सम्पर्क में आता है, उसे शुद्ध करती रहती है।
दूसरा गुण क्या है ? दमः यानी इन्द्रियों का दमन करना। अब प्रकृति में लीजिए आकाश, आकाश की क्या विशेषता है ? आकाश में सब कुछ निहित है, समाहित है। ऐसा कुछ भी नहीं है जो आकाश में न हो, लेकिन फिर भी आकाश क्या है ? इन सबसे अलग-थलग अपनी सत्ता को बनाए हुए है अर्थात् इन्द्रियों को पूर्णतः नियंत्रित करता है, उनका दमन करता है।
तीसरा गुण क्या है ? तपः यानी धर्म पालन के लिए तपस्या करना। पृथ्वी को लीजिए, यह सदैव दैविक, भौतिक, तमाम विपत्तियों को झेलती आ रही है, सहती आ रही है। इससे बड़ा तप करने वाला और कौन हो सकता है ?
चौथा गुण शौच है अर्थात् शुद्ध रहना। जल अपने आप में हर तरह की गन्दगी को समेटने के बाद भी शुद्ध है, निर्मल है, सरल है।
पाँचवाँ गुण है क्षमा का। क्षमा आप समझ रहे हैं, आप कहते भी हैं, समय प्रत्येक घाव को भर देता है यानी समय सबको क्षमा कर देता है।
छठाँ गुण है अर्जन का अर्थात् सरलता। वायु लीजिए, देख रहे हैं वायु आ रही है। कैसे आ रही है ? जैसे आप चाहते हैं, वैसे ही आ रही है। वह इतनी सरल है कि उसका अपना कुछ भी विरोध नहीं है, अपना कहीं भी कुछ ऐसा नहीं है जो उसकी सरलता को कम कर सके।
सातवाँ गुण है ज्ञान का। आप क्या करते हैं ? आप ज्ञान इकट्ठा करते हैं, लेकिन आप समुद्र को लीजिए, उसमें सब कुछ भरा पड़ा है। कुछ भी ऐसा नहीं है, जो समुद्र में न हो।
आठवाँ गुण क्या है ? विज्ञान। विज्ञान क्या होता है ? विशिष्ट ज्ञान। ज्ञान को परिभाषित करना ही विज्ञान है और यह काम कौन करता है, बताएंगे आप ? कौन परिभाषित करता है विज्ञान को ? प्रकृति में कौन-सा ऐसा तत्व है, जो विज्ञान को परिभाषित करता है ? सूर्य । सूर्य का क्या काम है ? यह सदैव प्रकाश बाँटता है, ज्ञान बाँटता है।
नौवाँ, जो अन्तिम गुण है, वह है- आस्तिक होना, ईश्वर में श्रद्धा रखना और प्रकृति में आप देखिए चन्द्रमा को, जो तमाम विसंगतियाँ झेलता है। घटना-बढ़ना उसका देखते हैं न, घटता जाता है फिर बढ़ता जाता है। यानी उसके जीवन में इतने उतार और चढ़ाव हैं फिर भी वह पूर्णतः आस्तिक है और उसी आस्तिकता का परिणाम है कि एक दिन वह पूर्णता को प्राप्त करता है।
आपने देखा, गीता में जो नौ ब्रह्मकर्म बताए गए हैं, ब्रह्मज्ञानी के जो नौ गुण बताए गए हैं, उन नौ गुणों को कौन धारण कर रहा है ? प्रकृति धारण कर रही है इसलिए प्रकृति शाश्वत है, अजर है और अमर है।
अब बात आती है घड़ी की, घड़ी यानी समय की। इस समय घड़ी में कितना बज रहा है ? इस समय घड़ी में नौ बजकर नौ मिनट नौ सेकेण्ड हो रहे हैं और आज दिनाँक क्या है ? नौ, नौ, दो हजार नौ। मैंने अभी बताया आपको कि इस वर्ष का यह दो सौ बावनवाँ दिन है। आज दिन बुधवार है, बुधवार यानी कि वैडनसडे। वैडनसडे में गिनिए डब्लू, इ, डी, एन, इ, एस, डी, ए, वाइ यानी वैडनसडे में कुल नौ अक्षर है।
महीना कौन-सा है ? सेप्टेम्बर, यानी एस, इ, पी, टी, इ, एम, बी, इ, आर। क्या देखा आपने ? यह सेप्टेम्बर भी नौ अक्षर से बना है।
पहला नौ, नौ, नौ का पेयर है, नौ बजकर नौ मिनट नौ सेकेण्ड। दूसरा क्या है ? नौ तारीख, नौवाँ महीना, नौवाँ वर्ष और तीसरा पेयर मैंने आपको बताया कौन-सा ? दो सौ बावनवाँ दिन यानी दो, पाँच और दो को जोड़ लीजिए। कितना हुआ ? नौ।
यहाँ वैडनसडे में भी नौ लेटर हैं और सेप्टेम्बर में भी नौ हैं। कुल कितना हुआ ? तीन जोड़े तैयार हो रहे हैं यहाँ, कुल मिलाकर तीन पेयर बन रहे हैं नौ के अंकों के। जब तीन पेयर बनेंगे नौ के अंकों के तो इसका क्या अर्थ होगा ? नौ के नौ अंक। है न विचित्र संयोग ! तो नौ के ये नौ अंक अर्थात् फिर नौ, जिस विचित्र संयोग में आपके सामने उपस्थित हैं, यह भी प्रकृति के ही एक गुण को बताते हैं।
प्रकृति का एक गुण जो बहुत अद्भुत है, विशिष्ट है और इसी से यह प्रकृति संचालित है, वह देखें क्या है ? प्रकृति में है- भूत, वर्तमान, और भविष्य। इसके बाद क्या है- आकाश, पाताल और जहाँ आप हैं यह मृत्युलोक। तीसरा पेयर- उत्पत्ति, पालन और संहार। यह भी तो प्रकृति के लक्षण हैं। यहाँ भी क्या है ? नौ है। यहाँ भी नौ की युति है न ?
अब देखें, नौ धन नौ धन नौ कुल सत्ताइस या नौ गुणें तीन बराबर सत्ताइस। सत्ताइस यानी दो और सात, इनका भी जोड़ नौ।
तो आइए इस घड़ी में, इस आश्चर्यजनक मुहूर्त में, इस विचित्र विलक्षण समय में हम सभी अपने इष्ट से प्रार्थना करें कि वह हमें सद्बुद्धि दे, वह हमें सद्प्रेरणा दे, वह हमें ऐसी शक्ति दे, जिससे हम इस दुनिया का कल्याण कर सकें।
बताइए, इस समय इस दुनिया को जो सबसे बड़ा खतरा है वह किससे है ? इस मुद्दे पर मेरी बात आपसे कई बार हो चुकी है। इस दुनिया को जो सबसे बड़ा खतरा है वह किससे है ? कोई एक विद्यार्थी बोले। पूरी दुनिया की बात कर रहा हूँ मैं, बहुत पुराना खतरा है। वही आज इस समय दुनिया के लिए सबसे बड़ा खतरा है, जिसके कारण सारी दुनिया चिंतित है, वह है- ग्लोबल वार्मिंग। मेरा आपसे कहना है कि इस शुभ मुहूर्त पर हम यह प्रण लें, यह निश्चय करें और दृढ़ इच्छाशक्ति से इसके लिए लगें कि हमें एकजुट होकर प्रयास करना है और इस पृथ्वी को ग्लोबल वार्मिंग से बचाना है।
ग्लोबल वार्मिंग से बचाने के लिए हमें क्या करना होगा ? बहुत सामान्य-सी बात है। पहले क्या करना होगा हमें ? हमारा पहला काम है- सेव एनर्जी। हमें ऊर्जा का क्षय रोकना है। दूसरा काम क्या करना है ? प्लांटेशन। हमें वृक्ष लगाने हैं। तीसरा काम जो हमें करना है वह है- प्राकृतिक संसाधनों का समुचित उपयोग।
प्रकृति ने हमें अपने जो संसाधन दे रखे हैं, जिनसे हमारा जीवनयापन होता है, उनका हमें उतना ही उपयोग करना है, जितना हमारे हिस्से में है। अगर हम इससे इतर कुछ भी करते हैं तो यह जानिए कि आज का यह जो संयोग है, हमारे किसी काम का नहीं है। आज के इस मुहूर्त में यदि हमने इसकी अवहेलना की, तो इसका हमारे लिए कोई अर्थ नहीं है। हमने इसे सेलिब्रेट नहीं किया।
अगर मैं आपसे कहूँ कि आप ऐसा बखूबी करते हैं, तो यह कितना सच होगा ? यह बात भी आपसे हो जाए। ऊर्जा का क्षय कितना रोकते हैं आप ? जब आप स्कूल पढ़ने आते हैं, बटन ऑन कर दिए, सारे पंखे चलते रहते हैं और आप प्रेयर में खड़े रहते हैं। घर पर क्या ऐसा ही करते होंगे ? यह आप जाने।
दूसरी बात वृक्ष लगाने वाली है। आप बागवानी करते हैं ? सभी लोग घर में गमला सजाए हुए हैं। उसमें पौधा लगाते हैं ? अपने जन्मदिन के दिन भी लगाते हैं या नहीं, आप स्वयं को टटोलिए, आपको पता चल जाएगा।
जो तीसरी बात है वह और भी महत्वपूर्ण है, जो यहाँ देखने में भी आती हैं। प्रकृति का सबसे अनुपम उपहार क्या है ? जल, और आप जल की कितनी बचत करते हैं ? बस टोटी खोल दिए और भाग गए, झरने की तरह पानी दिन भर गिरता रहता है। यह स्कूल की बात हुई। घर पर भगवान ही मालिक है। अब ‘आप जाने आपका काम जाने’।
अब चलिए, पुनः बात हो जाए नौ के अंक की। आप जानते ही हैं नौ का अंक सबसे बड़ा सिंगल डिजिट है। यह आपको पता है न ? जीरो से गिनती शुरू होती है और नौ पर जाकर रुक जाती है। यह नौ सबसे बड़ा सिंगल डिजिट है, यह इसकी एक विशेषता है। अभी आपने देखा है कि इसमें किसी भी अंक का गुणा कीजिए, यानी नौ में एक से लेकर नौ तक या किसी भी अन्य संख्या का गुणा कीजिए और फिर आप उसका योगफल देखिए, वह कितना होता है ? नौ ही होगा।
ज्योतिष में आपका बहुत विश्वास है न ? फिर आज ज्योतिष पर भी कुछ बात हो। नौ को ज्योतिष की दृष्टि से देख लिया जाए थोड़ी देर के लिए। आज की तिथि, आपको बताया मैंने, क्या है- नौ, नौ और नौ। अंक ज्योतिष की मैं बात कर रहा हूँ, इसका पहला डिजिट नाइन है। पहला डिजिट नाइन है तो यह हुआ मूलांक।
दूसरा स्थान क्या है ? सेप्टेम्बर का है। सेप्टेम्बर मतलब इस समय कन्या राशि चल रही है, इक्कीस अगस्त से लेकर बीस सितम्बर तक का जो समय है, वह कन्या राशि का समय है और कन्या राशि का जो कारक ग्रह है, वह है बुध। तो यह नौ, नौ की बात हो गई। अब आइए दो हजार नौ पर, दो हजार नौ के अंको को जोड़िए, क्या हो रहा है ? दो धन नौ, ग्यारह और एक-एक, दो।
मूलांक मैंने बताया आपको नौ। अब नौ में नौ जोड़िए, यानी नौ तारीख नौ महीना, तो नौ धन नौ, अट्ठारह और दो हजार नौ को जोड़ लीजिए, तो अट्ठारह धन दो, बीस और धन नौ, उनतीस। अब नौ धन दो, ग्यारह यानी कि दो। तो इस समय का शुभांक क्या हुआ ? दो हुआ और अभी-अभी मूलांक बताया आपको, नौ।
नौ मूलांक है, नौ का कारक ग्रह मंगल है और जो शुभांक है उसका कारक ग्रह चन्द्रमा है। मंगल और चन्द्रमा जब साथ-साथ आते हैं या मंगल और चन्द्रमा जब युति बनाते हैं, तो वह समय होता है राजयोग का।
राजयोग मतलब समझते हैं आप ? आज आप सभी राजा हैं। यह जो समय चल रहा है वह राजयोग का समय चल रहा है यानी कि यह समय आपका उत्तम है। कन्या राशि होने के कारण बुध का भी शासन है। कन्या राशि का कारक ग्रह कौन है ? बुध है न, तो बुध का भी शासन है। बुध क्या है ? बहुत धनाढ्य और मजबूत ग्रह है। ऐसी स्थिति में यह समय क्या हो गया आपके लिए ? उत्तम से अति उत्तम। अरे ! राजयोग चल रहा हो, आपके पास कुबेर ही हों, तो फिर कहना ही क्या है ? तो यह समय उत्तम ही नहीं अति उत्तम है आपके लिए।
आइए इसकी पुष्टि थोड़ी और हो जाए, हथेली पर, जिसे हाथ देखना कहते हैं आप। आप अपनी हथेली पर देखिए, कनिष्ठिका अंगुली है न, छोटी अंगुली जिसे कनिष्ठिका कहते हैं, इसके नीचे ऊँचा स्थान दिखाई दे रहा है ? यह जो ऊँचा स्थान है, बुध का पर्वत है और यह अँगूठे के नीचे जो स्थान दिखाई दे रहा है, यह मंगल का स्थान है। आप इसे उच्च मंगल कहते हैं, इसके ठीक सामने निम्न मंगल होता है। तो यह कनिष्ठिका पर बुध का स्थान है और अँगूठे के नीचे मंगल है और अँगूठे के विपरीत यह चन्द्रमा का स्थान है।
आप देखिए, कैसा त्रिकोण बन रहा है यहाँ ? क्या है इस कार्नर पर ? बुध है, यहाँ चन्द्रमा है और यहाँ मंगल है, तीनों मिलकर क्या बना रहे हैं ? देखिए, तीनों मिलने के बाद कितने सशक्त हो रहे हैं, इनका सशक्त होना देख रहे हैं ?
तीनों का एप्रोच क्या है ? इनसाइड है। यहाँ हल्की-सी गहराई देख रहे हैं, बुध का भी एप्रोच, मंगल का भी एप्रोच और चन्द्रमा का भी एप्रोच, इसका मतलब यह समय क्या है ? आपके एप्रोच में है, आपकी मुट्ठी में है, आप जैसा चाहें वैसा कर सकते हैं, आप जो चाहें सो कर सकते हैं, बशर्ते आप करना चाहें।
अन्य विशेषता जानना चाहते हैं नौ की ? नौ की विशेषता की अगर आप बात करते हैं, तो इस अंक की विशेड्ढता, इस अंक की महत्ता, यह क्या कम है कि हमें जन्म लेने के लिए नौ माह इन्तजार करना पड़ता है। यह श्रेय इस नौ के अंक को ही है।
आगे बढ़िए, नौ ग्रह- सूर्य, चन्द्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि, राहु और केतु। नवरात्रि, नवदुर्गा साल में दो बार आपको मनाना होता है। अखबार में ही पढ़ लेते होंगे कि प्रथम रात्रि क्या है ? प्रथम रात्रि किसे कहते हैं ? प्रथम शैलपुत्री, द्वितीय ब्रह्मचारिणी, तृतीय चन्द्रघण्टा, चतुर्थ कुषमाण्डा, पंचम स्कन्दमाता, षष्टम कात्यायिनी, सप्तम कालरात्रि, अष्टम महागौरी, नवम सिद्धिदात्री।
आइए नौ रत्न की बात हो जाए। नौ रत्न में क्या है ? माणिक्य, मोती, मूंगा, पन्ना, पुखराज, हीरा, नीलम, गोमेद और लाजावर्त। नौ निधि की बात हो। आपने अभी पिछली ही बार सुना है ‘अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता’ तो ये नौ निधि क्या हैं ? कच्छप, कुन्द, खर्व, नील, पदम, मकर, महापदम, महाषंख और मुकुन्द।
नौ रस आप पढ़ते हैं- श्रृंगार, हास्य, करुण, रौद्र, वीर, भयानक, अद्भुत, शान्त और वात्सल्य। नौ द्वार शरीर में हैं। दो आँख, दो कान, दो नाक, मुँह, गुदा, और जननेन्द्रिय। इसके अलावा यज्ञोपवित, यज्ञोपवित पहने देखा है आपने ? उसमें नौ धागे होते हैं।
नवमी भगवान श्रीराम का जन्म दिवस है और रामचरितमानस में भगवान ने स्वयं ही शबरी को नवधा भक्ति बताई है। वह क्या है ? सत्संग, कथा-श्रवण, गुरु-भक्ति, गुणगान, मंत्रजप, भजन, इन्द्रिय-नियंत्रण, समभाव और सन्तुष्टि।
साथ ही साथ नौ चीजें मना की गई हैं, वर्जित की गई हैं, उनका त्याग करने को कहा गया है। वह क्या है ? सुख, दुःख, सम्पत्ति, परिवार, बड़ाई, धन, बल, परिजन और चतुराई। भगवत पुराण में प्रह्लाद को नवधा भक्ति बताई गई। वह कौन-सी नवधा भक्ति हैं ? देखें- श्रवण, कीर्तन, स्मरण, चरण-सेवा, अर्चन, वन्दन, सखा-भाव, दासता और समर्पण।
अब बताइए, नक्षत्रों की संख्या कितनी है ? सत्ताइस। सत्ताइस यानी कि सात धन दो, बराबर नौ। ग्रहों की गति, उनके जो आर्बिट हैं, वह तीन सौ साठ डिग्री पर होती है। फिर तीन सौ साठ डिग्री मतलब तीन धन छः, नौ। शुरू में मैंने आपसे गीता के अठारहवें अध्याय की बात की थी। गीता में कुल कितने अध्याय हैं ? अठारह, यानी एक धन आठ, नौ। जो माला हम पहनते हैं जपने वाली, उसमें मनकों की संख्या कितनी होती है ? एक सौ आठ, यानी एक धन आठ, नौ।
पुराण कितने हैं ? अठारह पुराण है। महाभारत के कितने पर्व हैं ? अठारह हैं और दुर्गाजी के नाम ? एक सौ आठ और भोले बाबा के धाम ? वह भी एक सौ आठ।
तो क्या नौ अंक के महत्व को बताने के लिए और भी कुछ शेष है ? तुम्हारे लिए शेष हो या न हो, मेरे लिए शेष है। जिसकी कृपा से, जिसकी कृपा के लिए हम यहाँ खड़े हैं, वह कौन हैं, बताइए ? माँ सरस्वती और उन्हें हम वीणावादिनी कहते हैं और क्या कहते हैं ? ‘वर दे, भर दे, सब कुछ दे दे’ जैसे भिखारी खड़े हैं दरवाजे पर।
भीख माँगने की आदत तो है ही लेकिन चलिए, माँ सरस्वती से माँगते हैं तो कोई बात नहीं है। माँ सरस्वती की जो हम वन्दना करते हैं, उसमें भी नौ के अंक का जो गुणांक है, वह महत्वपूर्ण है। देखिए, निराला जी ने कैसे माँ सरस्वती की वन्दना की है-
नवगति, नव-लय, ताल छंद नव,
नवल कण्ठ नव जलद मन्द्ररव
नव नभ के नव विहग वृन्द को
नव पर नव स्वर दे
वर दे, वीणावादिनी वर दे।
क्या देखा आपने ? इसमें नव का नौ बार प्रयोग हुआ है और यही कारण है कि यह वन्दना इतनी शिरोधार्य है, इतनी मान्य है और इसलिए स्तुति के लिए इसका इतना प्रयोग होता है।
अब मैं अपनी बात समाप्त करने के पहले आपको नव का अर्थ बता दूँ। नव का अर्थ क्या है ? एक तो सबसे बड़ा अंक और दूसरा नव मतलब नया, नवीन। यानी जो नव के बारे में सोचता है, वह सदैव नया होता जाता है, वह सदैव नवीन होता जाता है, उसके अन्दर कोई-न-कोई नई बात आती जाती है।
प्रिय विद्यार्थियों, नव में और क्या है ? नव में नमन है। आप जानते हैं जो झुकता है, वह बहुत ऊँचाई तक जाता है। कहा भी गया है कि जो चीज जितनी नीचे से शुरू होती है, वह उतनी ही ऊँचाई तक पहुँचती है, यह भी नव का अर्थ है।
जो नव का सबसे महत्वपूर्ण अर्थ है, जो नव से ही बनता है, वह है- नाव और नाव का काम क्या है ? नाव का काम है पार लगाना। जो भी नाव पर चढ़ गया, वह पार हो गया। मेरा यही कहना है कि अगर आप इस नव पर सवार हो गए हैं, तो निष्चित पार हो जाएंगे।
प्रिय विद्यार्थियों, इस नव के महात्म्य को समझें। इस घड़ी और इस संयोग को अगर आप धारण कर लें, दृढ़ इच्छाशक्ति से लग जाएं, तो निष्चित ही, कल आप अपने लक्ष्य पर होंगे। यह इस नौ के अंक की विशेषता है, क्योंकि सबसे शक्तिशाली अंक नौ है। सबसे शक्तिशाली अंक कौन है ? नौ है। मैंने अभी बताया आपको, नौ का कारक ग्रह मंगल है। बताया न मैंने आपको ? मंगल यानी हनुमान जी।
हनुमान जी की गदा के सामने कोई रुकता नहीं है। जिसने भी इसे धारण कर लिया, नौ अंक के महत्व को समझ लिया। मुझे नहीं लगता कि फिर उसे और भी कुछ समझाना शेष है, कुछ बताना शेष है, बस जरूरत है लगने की। लगते ही आप अपने लक्ष्य पर होंगे।
आप इस दिशा में लगे हैं, लगे रहेंगे, आप सफल हो रहे हैं, आप सफल होते रहेंगे, आप सफल हों।
शिवोऽहम्
मैं कल्याणकारी हूँ।
धन्यवाद।